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हिम्मत से कमाई गई शोहरत।

" जिस दिन जीवन में कोई समस्या ना आए तो ध्यान से चैक कर लिजिए कि कहीं आज हम गलत रास्ते पर तो नहीं चल रहे।" यह बात स्वामी विवेकानंद कहा करते थे। हमारे जीवन की समस्याएं कोई दुर्भाग्य नहीं है,बल्कि लगभग हम सभी के जीवन का हिस्सा है। संघर्षशील व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को गहरा बना लेते हैं और जिन्हें बिना संघर्ष के सब मिल जाए वो उथले या अन-पोलिशड़ रह जाते हैं इसलिए जीवन में संघर्ष की भी एक अलग ही अहमियत है। इस साल राजस्थान के उदयपुर में राष्ट्रीय पैरा स्वीमिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उसमें वैसे तो अनेक प्रतिभागी ऐसे थे जिन्होंने अपने जूनून और हौसले के आगे अपनी किसी भी शारीरिक कमजोरी को आगे नहीं आने दिया। लेकिन यहां मैं दो ऐसी महिलाओं का जिक्र करना चाहूंगी जिन्होंने पैरा स्वीमिंग प्रतियोगिता में सफलता की एक नई कहानी लिख डाली।

तो आइए, सबसे पहले मिलते हैं -- महाराष्ट्र के नागपुर की 30 वर्षीय कंचनमाला पांडे से , जिन्हें जन्म से ही दिखाई नहीं देता। लेकिन पैरा स्वीमिंग में वे 125 गोल्ड मेडल जीत चुकीं हैं। बचपन में मां पिता ने उन्हें पैरा गेम्स के लिए प्रेरित किया तो उन्होंने कड़ी मेहनत की लेकिन जब चयन नहीं हुआ तो बहुत निराश हुईं और इस निराश के दौर में उन्हें कई बार आत्महत्या का विचार भी आया। लेकिन फिर हिम्मत जुटाई और सफलता की नई कहानी लिख डाली।

आइए,अब मिलते हैं -- कोलकाता में जन्मी 44साल की साधना सिंह से। जब वे 8 वर्ष की थी तो प्लेटफार्म से रेलवे ट्रैक पर गिर गई। दोनों पैर पर से ट्रेन गुज़र गई।2004 मे प्रास्थेटिक फुट बनवाने गई। वहां पैरा एथलीट देखे तो उनसे प्रेरित हो गई। अब वे जयपुर में रहती है। राजस्थान का प्रतिनिधित्व करती है। स्वीमिंग व एथलेटिक्स में 62 मेडल जीत चुकीं हैं।

मेरे प्यारे दोस्तों,इन दोनों महिलाओं के साहस को देखकर हम सीख सकते हैं कि यदि हम अपनी परेशानियों पर फोकस ना करके अपने इरादों और अपने लक्ष्य पर फोकस करें तो कुछ भी असम्भव नहीं है। सपने देखना तो आसान है लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए कड़ी मेहनत और जज़्बा चाहिए होता है। सपनों को साकार करने और हकीकत में बदलने के ये उदाहरण हमें हिम्मत देते हैं। रास्ते में चाहे कितनी मुश्किलें आएं लेकिन उन्हें पार करने के बाद ही मिलती है वो दुनिया ,जिसका हमने कभी सपना देखा था। हमें यह बात समझनी चाहिए कि हम स्वयं ही अपने जीवन के इंचार्ज है... अगर आपको लगता है कि कोई और आकर आपकी मदद करेगा या आपको आपकी समस्याओं से बाहर निकालेगा तो आपका यह इंतजार बहुत लंबा चलता जाएगा। मैं उम्मीद करती हूं कि बिना किसी और का इंतजार किए आप स्वयं ही, अपने सपनों को पूरा करने के लिए आज से ही उड़ान भरने की तैयारी शुरू कर देंगे, करेंगे ना ?

नवतरंग की शुभकामनाएं!!!

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