top of page

हुनर + हौंसला = मुकाम

हुनर तो कई लोगों में होता है लेकिन इसके साथ हौसला हो तो मुकाम तक पहुंचना मुश्किल नहीं होता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजस्थान की रूमादेवी ने। राष्ट्रपति के हाथों नारी शक्ति अवार्ड पाने वाली रूमा देवी को डिजायनर ऑफ द ईयर 2019 का अवार्ड से नवाजा जा चुका है।


श्रआइए जानते हैं इस नारी शक्ति के बारे में जिसने बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों को इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचा दिया।


रूमा देवी मूलरूप से बाड़मेर जिले के एक गांव की रहने वाली हैं।17 साल की उम्र में शादी हो जाने के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। ससुराल में भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। तब रूमा ने तय किया कि क्यों ना आत्मनिर्भर बना जाए।लेकिन उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करें। तब उनको याद आया कि उन्होंने बचपन में अपनी दादी से कशीदाकारी का काम सीखा था।तब रूमा देवी ने अपने कॉटन के कपड़े और साड़ियों पर कशीदाकारी करनी शुरू की और इसी काम को आगे बढ़ाने का सोचा उन्होंने कुछ मटेरियल खरीदा और उसका बैग बनाकर आसपास की दुकानों पर सप्लाई करने लगी। धीरे-धीरे उनकी डिमांड मार्केट में बढ़ने लगी तो इन्होंने वर्ष 2006 में गांव की 10 महिलाओं के साथ जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। समूह ने कुशन और बैग बनाने शुरू किए। शुरुआत में दिक्कत आई, मगर फिर धीरे- धीरे व्यवसाय चलने लगा तो उसने अपनी जैसी ही अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की ठानी और फिर दूसरे गांवों में भी काम शुरू किया।


समूह के काम को बाड़मेर की ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान ने सराहा वर्ष 2008 रूमा को संस्थान में सदस्य बनाया। दो साल तक रूमा इस संस्थान की अध्यक्ष भी रहीं।संस्थान में उन्हें हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने के साथ ही मार्केटिंग के गुर भी सिखाए गए।नतीजा यह रहा कि विदेशी सैलानियों को समूह के उत्पाद खास पसंद आने लगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिली। लंदन, कोलंबो, जर्मनी व सिंगापुर के फैशन वीक्स में भी उनके उत्पादों का प्रदर्शन हो चुका है


मेरे प्यारे दोस्तों, देखा आपने आठवीं पास रूमा देवी ने केवल अपनी ही नहीं बल्कि हजारों महिलाओं की जिंदगी कैसे बदल दी। अगर आपमें लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला है,साहस है तो जीवन की किसी भी चुनौती को सामना करते हुए अपने मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।करके देखिएगा। करेंगे ना ?


बहुत सारी शुभकामनाएं!!!❤️

Recent Posts

See All

सोच बदलें तो...बदलेगें हालात।

अभी कुछ महीनों पहले अमेरिका मे डाक्टरों के बीच हुए सर्वे के मुताबिक महिला और पुरुषों का काम -ओहदा भले ही एक जैसा हो लेकिन आमदनी में पुरुष ही आगे रहते हैं। इस स्टडी के प्रमुख हेल्थ इकोनोमिस्ट क्रिस्टो

हिंदी मीडियम

हम में से बहुत से लोगों का मानना है कि कामयाबी का रास्ता इंग्लिश भाषा का ज्ञान होने से ही निकलता है। है ना ? पर क्या सचमुच ? यदि आप भी यह मानते हैं तो आपको प्रीति हुड्डा के बारे में अवश्य जानना चाहिए।

Comments


bottom of page